पशुओं में नस्ल सुधार
By-Dr.Savin Bhongra
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उन्नत पशु प्रजनन
उन्नत नस्ल के चुने हुए उच्चकोटि के सांड से प्राप्त बछड़े-बछियों में अधिक उत्पादन क्षमता होती है। इसलिये निरंतर विकास हेतु हर समय उन्नत नस्ल के उच्चकोटि के सांड से पशुओं को प्रजनन कराना चाहिए। इसलिये उच्चकोटि के चुने हुए कीमती सांडों का क्रय, उनकी देखभाल, पालन-पोषण की जिम्मेदारी शासन एवं विभिन्न अन्य संस्थानों ने ली है और इन उच्चकोटि के सांडों द्वारा अनेक पशुओं में प्रजनन कराने के उद्देश्य से कृत्रिम गर्भाधान योजना को कार्यान्वित किया गया है।
उन्नत पशु प्रजनन हेतु कृत्रिम गर्भाधान की पद्धति————–
कृत्रिम गर्भाधान हेतु अनेक पशुओं में गर्भाधान कराने हेतु कम सांडों की आवश्यकता होती है, क्योंकि एक सांड द्वारा कृत्रिम गर्भाधान विधि से 10,000 तक मादाओं में प्रजनन संभव होता है इसलिये उच्चकोटि के सांडों का चयन करना, चुने हुए उच्चकोटि के सांडों का उपयोग मादाओं में प्रजनन हेतु कराना तथा हजारों की संख्या में उन्नत बछड़े-बछिया उत्पन्न कराना कृत्रिम गर्भाधान से ही संभव है। इसलिये कृत्रिम गर्भाधान को पशु विकास का मुख्य आधार तथा पशु विकास की कुंजी कहा जाता है। सारी दुनिया ने इस पद्धति से ही पशुपालन के क्षेत्र में विकास किया है।
प्राकृतिक विधि से सांडों के उपयोग————–
प्राकृतिक पद्धति से एक सांड द्वारा एक वर्ष में 60 से 100 पशुओं में ही प्रजनन संभव होता है। इसलिये कोटि के नहीं हो सकते, इसलिये इनसे उत्पन्न संतानें उच्चकोटि की नहीं होगी, परंतु उच्चकोटि का सांड चयन कर कृत्रिम गर्भाधान द्वारा उच्च कोटि की संतानें हजारों की संख्या में उत्पन्न की जा सकती हंै।
कार्य क्षेत्र में कृत्रिम गर्भाधान का नियोजन – पुरानी तकनीकी को छोड़कर नई तकनीकी से जुडऩे में काफी समय लग जाता है। यह कार्य सूचना का आदान-प्रदान कर, परिणाम दिखाने व निरन्तर रूप से विभिन्न वर्गों से जीवित संपर्क करके ही किया जाना संभव है। अपने कार्य क्षेत्र में कृत्रिम गर्भाधान हेतु कार्य का नियोजन निम्नानुसार किया जा सकता है।
प्रजनन योग्य पशुओं का विवरण ——————-
कृत्रिम गर्भाधान के कार्यक्रम को सुचारू रूप से प्रारंभ करने के लिये यह आवश्यक है कि कार्यक्षेत्र में 1500-2000 प्रजनन योग्य पशु हो। इसके लिये स्वयं समय-समय पर सर्वेक्षण कर इसकी जानकारी संस्था स्तर पर रखी जाना आवश्यक है। गांव में कम पशु होने की दशा में अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार 10-12 कि.मी. की दूरी तक किया जा सकता है, ताकि समय-समय पर सूचना प्राप्त हो सके एवं समय-समय पर पशु मालिकों से निरन्तर जीवित संपर्क रखा जा सके। इस हेतु मुख्य गांव के आसपास के गांवों का सर्वेक्षण कर,अपनी सुविधानुसार ज्यादा से ज्यादा प्रजनन योग्य पशु अपने कार्यक्रम में लें। सर्वेक्षण के समय देशी/संकर नस्ल/छोटे वत्स/भैंस/बिना बधिया के बैल/बधिया किये हुए सांडों की संख्या की जानकारी भी एकत्र करना आवश्यक है।
तकनीकी स्तर में सुधार———
नैसर्गिक रूप से प्रजनन होने पर सामान्यत: 40 प्रतिशत तक पशु गर्भित होते हैं। कृत्रिम गर्भाधान द्वारा भी यह परिणाम प्राप्त किया जाना संभव है। अपने तकनीकी स्तर के ज्ञान के माध्यम से गर्भित होने के प्रतिशत को ज्यादा से ज्यादा अच्छा रखकर ही पशु पालकों में विश्वास जगाया जा सकता है अन्यथा पशुपालकों द्वारा फिर से अपने पुराने तरीके का प्रयोग किये जाने से कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम असफल हो जाता हैं।